जलवायु परिवर्तन के कारण भोपाल जैसे शहरी क्षेत्रों में हीट वेव और बाढ़ जैसी आपदाओं की तीव्रता बढ़ रही है। इन आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ता है, जो आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं से वंचित होते हैं। इन समस्याओं को समझने और समाधान खोजने के लिए मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) ने एक महत्वपूर्ण GIS आधारित सर्वेक्षण परियोजना शुरू की है।
GIS सर्वेक्षण का उद्देश्य और महत्व
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भोपाल शहर में हीट वेव और बाढ़ जैसी जलवायु आपदाओं के प्रभावों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। इसके माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की जाएगी कि शहर के कौन से क्षेत्र अधिक गर्मी और जलजमाव से प्रभावित हैं, विशेषकर घनी आबादी वाले इलाकों और स्लम बस्तियों में। इस डेटा का उपयोग करके अनुकूलन उपायों की योजना बनाई जाएगी।
चरणबद्ध कार्य योजना

- चरण 1 (13-16 मई): हीट वेव से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और डेटा संग्रहण।
- चरण 2 (सितंबर): बरसात के दौरान जलजमाव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण।
- चरण 3 (नवंबर): स्थानीय निकायों और नीति निर्धारकों के साथ निष्कर्ष साझा करना और शहरी नीति निर्माण में योगदान देना।
एप आधारित मैपिंग और सामुदायिक भागीदारी
इस सर्वेक्षण को एप आधारित बनाया गया है, जिससे नागरिक भी इसमें सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं। ओपिनियन टूल के माध्यम से विशेषज्ञों, स्थानीय प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की जानकारी एकत्र की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में किस प्रकार की जलवायु आपदा का खतरा अधिक है और वहां किस प्रकार के अनुकूलन उपाय किए जा सकते हैं।
बॉटम-अप अप्रोच: समुदाय आधारित समाधान
इस परियोजना का संचालन डॉ. सुरभि मेहरोत्रा, डॉ. प्रेमजीत दास गुप्ता और डॉ. अर्शी पराशर द्वारा किया जा रहा है। डॉ. मेहरोत्रा के अनुसार, यह पहल बॉटम-अप यानी नीचे से ऊपर की नीति निर्माण प्रक्रिया का उदाहरण है, जिसमें समस्या का हल समुदाय की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाएगा।
इस परियोजना के माध्यम से प्राप्त डेटा और निष्कर्षों का उपयोग करके भोपाल शहर के लिए हीट एक्शन प्लान, बाढ़ नियंत्रण उपाय और शहरी डिजाइन नीति तैयार की जाएगी। यह पहल न केवल भोपाल जैसे तेजी से शहरीकरण होते शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक ऐसा मॉडल बन सकता है जिसे देश के अन्य शहरों में भी अपनाया जा सके।

