बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर जारी ओपिनियन पोल ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस सर्वे में जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 42% समर्थन के साथ अब भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं, वहीं तेजस्वी यादव 15% पर पीछे नजर आ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पहली बार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने भी 9% लोगों का समर्थन हासिल कर लिया है।

हालिया ओपिनियन पोल के आंकड़े बताते हैं कि प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी ने लोगों के बीच गहरी पकड़ बना ली है। यह न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि बिहार की राजनीति में एक सस्पेंस फैक्टर भी जोड़ता है – क्या जनता बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है?
जन सुराज पार्टी का बढ़ता प्रभाव
हालिया ओपिनियन पोल के आंकड़े बताते हैं कि प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी ने लोगों के बीच गहरी पकड़ बना ली है। यह न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि बिहार की राजनीति में एक सस्पेंस फैक्टर भी जोड़ता है – क्या जनता बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है?
जहां एक ओर पारंपरिक दलों की लोकप्रियता कुछ हद तक स्थिर दिखाई दे रही है, वहीं जन सुराज पार्टी, जो पहली बार चुनावी मैदान में कदम रख रही है, उसने 9% जनता की पहली पसंद बनकर सबको चौंका दिया है।
मुख्यमंत्री पद के लिए लोगों की पसंद:
नीतीश कुमार: 42%
तेजस्वी यादव: 15%
प्रशांत किशोर (जन सुराज): 9%
चिराग पासवान: 8%
सम्राट चौधरी: 3%
अन्य: 23%
यह आंकड़े बताते हैं कि जनता अब विकल्प चाहती है – और वो विकल्प उन्हें जन सुराज पार्टी के रूप में दिखाई दे रहा है।
जनता की चुप्पी या रणनीति
प्रशांत किशोर को लेकर जो 9% आंकड़ा दिख रहा है, वो असल में सिर्फ एक शुरुआत हो सकती है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बिहार की जनता अक्सर मौन वोटर होती है – जो चुनाव के दिन ही अपना असली फैसला सुनाती है।
ऐसे में प्रशांत किशोर के लिए यह आंकड़ा एक मजबूत नींव हो सकता है, जिस पर चुनावी जीत की इमारत खड़ी की जा सकती है।
क्या जनता चुपचाप कोई बड़ा फैसला लेने जा रही है? क्या जन सुराज पार्टी चुनावी नतीजों में सबको चौंका देगी? ये सवाल अब बिहार की सियासत का सबसे बड़ा सस्पेंस बन गए हैं।
चुनाव की तारीखें
चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया है:
पहला चरण: 6 नवंबर, 2025
दूसरा चरण: 11 नवंबर, 2025
परिणाम घोषित: 14 नवंबर, 2025
प्रशांत किशोर और जन सुराज पार्टी की चुपचाप बढ़ती लोकप्रियता इस चुनाव को रोचक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बना सकती है। अगर जनता का यह सस्पेंस वोट में बदलता है, तो 14 नवंबर को बिहार की सियासत में एक नई सुबह देखने को मिल सकती है।

