बिहार

मुकेश सहनी के पोस्टर से महागठबंधन गायब, X पर दिया संकेत – बदल सकते हैं पाला?

बिहार की सियासत में फिर गर्मी है। ‘सन ऑफ मल्लाह’ कहे जाने वाले मुकेश सहनी के बदले सुर और पोस्टर से महागठबंधन की गैरमौजूदगी ने नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर दिया है। सीट शेयरिंग को लेकर तेजस्वी यादव के रुख के बाद सहनी ने सोशल मीडिया पर महागठबंधन से दूरी बनाते दिखने वाले संकेत दिए हैं। वहीं तेजस्वी ने भी देर शाम इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के मुखिया IP गुप्ता से मुलाकात कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि विकल्प तैयार हैं। क्या मुकेश सहनी पाला बदलने की तैयारी में हैं? सवाल उठने लाज़िमी हैं।

सहनी की ओर से जारी किए गए पोस्टर ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। पहले तो उन्होंने एक तस्वीर जारी की, जिसमें ‘सबका सम्मान करने वाली सरकार बनाएंगे’ लिखा था, लेकिन इसमें महागठबंधन का कोई जिक्र नहीं था। तीन दिन पहले उन्होंने ’14 नवंबर को महागठबंधन सरकार आ रही है’ वाला पोस्ट दिया था। यह बदलाव गठबंधन में संभावित दरार का संकेत दे रहा है।

EBC फॉर्मूला या चेतावनी?


पोस्ट के तुरंत बाद शनिवार की देर शाम तेजस्वी यादव ने इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के नेता IP गुप्ता से मुलाकात की। IP गुप्ता ने इस मुलाकात का वीडियो X पर साझा किया, साथ में कविता जैसी भाषा में लिखा: “पहली मुलाकात है, मिला मजबूत साथ है।”
इस मुलाकात के दो संभावित अर्थ निकाले जा रहे हैं। एक तो यह कि अगर सहनी महागठबंधन से अलग हो जाएं, तो IP गुप्ता को EBC (अत्यंत पिछड़ी जाति) का चेहरा बनाकर आगे बढ़ाया जा सकता है। दूसरा यह कि IP गुप्ता के नाम पर सहनी को एक हिदायत भेजी जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि फेसबुक पोस्ट के मात्र चार घंटे बाद सहनी ने एक बयान जारी कर कहा: “महागठबंधन अटूट है। हम लोग महागठबंधन के साथ हैं।” यह 180 डिग्री का बदलाव था। लेकिन सहनी के पार्टी के एक नेता ने दैनिक भास्कर को बताया, “हमारे हाथ को बांध दिए गए हैं। बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन अभी कुछ भी बोलने से मना किया गया है।”

अमित शाह की चिंता

महागठबंधन की इस अस्थिरता के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में NDA के सहयोगी दलों की आपात बैठक बुलाई। हालांकि इस बैठक के विवरण खुलासे के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो सहनी के नाम पर ही मुख्य चर्चा हुई।
अगर मुकेश सहनी महागठबंधन छोड़कर NDA में आ जाते हैं, तो सभी गठबंधन दलों को अपने-अपने हिस्से की सीटें सहनी को देनी होगी। यह एक बड़ा राजनीतिक फायदा हो सकता है।
अब महागठबंधन की फाइनल मीटिंग दिल्ली में होगी। तेजस्वी यादव और लालू यादव रविवार सुबह दिल्ली जाने वाले हैं। बिहार में बातचीत सफल न हो सकने के बाद अब कांग्रेस और राजद की टॉप लीडरशिप की बैठक होगी, जहां सहनी के बारे में अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

मुकेश सहनी की असली ताकत

मुकेश सहनी भले ही अपनी चुनावी उम्मीदवारी पर हार खा रहे हैं, लेकिन बिहार में निषाद समुदाय के एक शक्तिशाली नेता के रूप में उनकी हैसियत अलग है। निषाद समुदाय की जनसंख्या बिहार में लगभग 2.5% है।

मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, खगड़िया और सहरसा (मिथिलांचल-कोसी क्षेत्र) की 25 से 30 सीटों पर वो हार-जीत का बड़ा फैक्टर हैं

इन इलाकों में निषादों की काफी आबादी है

भले ही सहनी खुद सीट न जीतें, लेकिन अपनी जाति में उनकी पकड़ गहरी है

यह पकड़ उपेंद्र कुशवाहा की कुशवाहा समुदाय में RLSP के माध्यम से जितनी ही मजबूत है

दोनों गठबंधन उन्हें खुश रखने में विशेष दिलचस्पी दिखा रहे हैं क्योंकि उनका वोट कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकता है

अगले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकते हैं। मुकेश सहनी का फैसला न केवल महागठबंधन की मजबूती के लिए बल्कि पूरे चुनाव परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दिल्ली में होने वाली बैठक में जो निर्णय लिए जाएंगे, वह बिहार की राजनीति का रुख तय कर सकते हैं।

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