भारतीय चिकित्सा विज्ञान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में, मंगलम हेल्थ फाउंडेशन, भारत के डॉ. भुवनेश्वर गर्ग को मेडस्टार हेल्थ, वाशिंगटन डीसी (8-11 अप्रैल, 2026) में आयोजित होने वाले वैश्विक सम्मेलन ‘डायबिटिक लिम्ब साल्वेज’ में अपना शोध प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

2,500 से अधिक सफल मामलों के अनुभव के साथ, डॉ. गर्ग ने 450 से अधिक ‘एंड-स्टेज डायबिटिक गैंग्रीन’ के मरीजों के अंगों को कटने से बचाया है। उनका शोध पारंपरिक उपचारों से पैदा होने वाले ‘टॉक्सिक वुंड एनवायरनमेंट’ और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (AMR/MDR) की चुनौती का प्रभावी समाधान प्रदान करता है।

एक ‘गेमचेंजर’ खोज-
इस नवाचार की महत्ता WHO और लैंसेट के उन डरावने आंकड़ों से समझी जा सकती है, जिनमें एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभावों से हर साल एक करोड़ दस लाख (11 million) मौतों की चेतावनी दी गई है। दुनिया में हर 20 सेकंड पर एक पैर काटा जा रहा है और हर साल ढाई लाख बच्चियां जलने के कारण चेहरे की विकृति का दंश झेल रही हैं। डॉ. गर्ग की यह खोज इन शक्तियों और इलाज के भारी खर्च को बेहद कम करने में एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो रही है।
नवाचार की मुख्य विशेषताएं
1. हीलिंग पदानुक्रम: यह सिद्ध करता है कि गहरे ऊतक (हड्डी/मांसपेशी) पहले विकसित होते हैं और 14 दिनों में त्वचा की गहरी परत का पुनर्निर्माण होता है।
2. हीलिंग एट होम (घर पर उपचार): एक अनूठा ‘व्हाट्सएप टेली-सुपरविजन’ मॉडल, जो मरीजों को अस्पताल के भारी खर्च के बिना घर पर ही विशेषज्ञ देखरेख में ठीक होने की सुविधा देता है।
राष्ट्रीय मिशन का आह्वान: डॉ. गर्ग ने मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार से इसे ‘राष्ट्रीय मिशन’ बनाने का आग्रह किया है। यह मॉडल न केवल स्वास्थ्य खर्च बचाएगा, बल्कि पैरामेडिक्स के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगा और भारत को मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बनाएगा।

डॉ. गर्ग ने कहा…
हम केवल घाव नहीं भर रहे, हम अंगों को पुनर्जीवित कर रहे हैं। सरकारी सहयोग से यह ‘मेड इन भारत’ मॉडल देश को एम्प्यूटेशन-मुक्त बना सकता है


