इंदौर की तरह ही राजधानी भोपाल को मुक्त बनाने की योजना चल रही है। इसको लेकर राजधानी में भीख मांगने और देने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। भीख मांगने और देने वालों दोनों पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी हैं। कलेक्टर ने कार्रवाई के लिए टीमें भी गठित कर दी हैं। ये टीमें जाकर भिखारियों की तलाश कर रही हैं. इसी क्रम में राजधानी भोपाल में भीख लेने और देने वाले दोनों पर पहली बार एफआईआर भी दर्ज हो गई है।
वीडियो के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर
दरअसल, राजधानी भोपाल को भिखारी मुक्त बनाने की योजना चल रही है। इस लेकर प्रशासन पूरी तरह सख्त है। भीख लेने-देने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश हैं। पहली बार वीडियो के आधार पर एमपी नगर थाने में FIR हुई। कलेक्टर की ओर से बनाई गई टीम के 8 सदस्य कल दोपहर में बोर्ड ऑफिस चौराहे पर पहुंचे। इस दौरान भीख देने वाले ट्रक चालक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
कलेक्टर ने जारी किया था आदेश

गौरतलब है कि हाल ही में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध के आदेश जारी किए। आदेश के मुताबिक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 अंतर्गत धारा 163 में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए भोपाल जिले के समस्त राजस्व सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की भिक्षावृत्ति को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाता है। आदेश के मुताबिक, भोपाल में भिखारियों को भिक्षा स्वरूप कुछ भी देना प्रतिबंधित कर दिया गया है।
कलेक्टर ने यह भी आदेश दिया है कि भीख लेने और देने दोनों वालों पर एफआईआर दर्ज होगी। इसकी निगरानी के लिए प्रशासन चौराहों पर लगे CCTV कैमरों की मदद भी ले रहा है। वहीं, कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के तहत भिखारियों को रैन बसेरा में शिफ्ट कर दिया गया है। रैन बसेरे को भिक्षुक गृह के रूप में आरक्षित किया गया है।
जानिए क्यों जारी करना पड़ा ऐसा आदेश
बता दें कि इस आदेश को जारी करते वक्त कलेक्टर ने बताया था कि भोपाल जिले में इस प्रकार की भिक्षावृत्ति में अन्य राज्य एवं शहरों के व्यक्ति भी संलग्न रहते हैं।। इसमें कई व्यक्तियों का आपराधिक इतिहास भी रहता है। भिक्षावृत्ति कार्य में संलग्न अधिकांश व्यक्ति नशे या अन्य गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। इसकी आड़ में वे आपराधिक गतिविधि कर देते हैं। भिक्षावृत्ति समाजिक बुराई है। इसलिए इसे रोकने के लिए आदेश जारी किए गए हैं।

