भोपाल में 1 अप्रैल से नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू हो जाएगी। इसमें 1283 लोकेशन पर प्रॉपर्टी के रेट औसतन 18 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। कहीं-कहीं तो 5% से 300% तक दरें बढ़ेंगी।
अब यह प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा। इससे पहले विरोध भी हो रहा है। मंत्री, सांसद-विधायकों के सामने मुद्दा उठाने के बाद अब क्रेडाई मुख्य सचिव अनुराग जैन से भी मिलेगा।
वहीं, एक्सपर्ट इस पर रोक लगाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात भी कह रहे हैं। क्रेडाई अध्यक्ष मनोज मीक ने बताया कि भोपाल में क्रेडाई, कलेक्टर गाइडलाइन पर रोक लगाने की मांग कर रहा है, क्योंकि यहां लगातार कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ रही है। मीके मुताबिक-
इसे लेकर मंत्रियों, सांसदों और विधायकों तक से मिल चुके हैं। उन्होंने भी गाइडलाइन को बढ़ना अनुचित बताया है। इसलिए भोपाल की कलेक्टर गाइडलाइन तुरंत रोकी जानी चाहिए।
केंद्रीय मूल्यांकन कमेटी को भेजा जा रहा प्रस्ताव
13 मार्च को उप मूल्यांकन समिति की मीटिंग हुई थी। इसमें भोपाल की कलेक्टर गाइडलाइन दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसे लागू करने से पहले दावा-आपत्ति लिए गए। इस दौरान करीब 200 दावा-आपत्ति आए। वहीं, बैठक के बाद अब केंद्रीय मूल्यांकन कमेटी को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
200 से ज्यादा आपत्ति, कोलार-होशंगाबाद रोड की ज्यादा
राजधानी में 2887 लोकेशन में से 1283 में 5% से 300% तक दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है। कोलार और होशंगाबाद रोड पर दर बढ़ोतरी को लेकर सबसे ज्यादा आपत्तियां आई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 200 से 300% तक वृद्धि पर बैठक में चर्चा होगी।
संभावना है कि इस बढ़ोतरी को आंशिक रूप से वापस लिया जा सकता है। 2011-12 में जमीनों के दाम में 31.50% का इजाफा हुआ था। इस बार औसतन 18% वृद्धि प्रस्तावित है। ग्रामीण क्षेत्रों में दरें 300% तक बढ़ सकती हैं।
दूसरी ओर, भोपाल जिले में लोकेशन की संख्या 3883 से घटाकर 2885 कर दी गई हैं। 1283 लोकेशन पर गाइडलाइन दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है, जबकि 1601 लोकेशन पर दरें जस की तस रहेंगी। 7 नई लोकेशन जोड़ी गई हैं। पिछले साल 1443 लोकेशन पर 7.19% की औसत बढ़ोतरी की गई थी।
गाइडलाइन को लेकर क्रेडाई की मांगें
- कलेक्टर गाइडलाइन दरों में वृद्धि पर फौरन रोक लगाई जाए।
- साल 2019-20 (PRE-COVID) के स्तर पर दरों को वापस लाया जाए।
- कृषि भूमि सहित सभी जरूरी उपबंध (प्रोविजन) खत्म किए जाएं।
- तीन साल तक किसी भी बढ़ोतरी पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाकर गाइडलाइन दर की तय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
पिछली बार प्रस्तावित गाइडलाइन रोक दी गई थी
पिछले साल नवंबर में साल की दूसरी (संशोधित) गाइडलाइन प्रस्तावित की गई थी। इसमें 1283 लोकेशंस पर जमीनों के भावों में 5 से 200 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि प्रस्तावित की गई थी।
उस समय भाजपा सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवान सबनानी, रियल एस्टेट कारोबारियों की संस्था क्रेडाई भोपाल ने इसका विरोध किया था। वे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा से भी मिले थे। इसके बाद इसे टाल दिया गया था।

