मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुपोषित महिलाओं और बच्चों वाले परिवारों को दुधारू गाय देने का फैसला किया है। इसके साथ ही टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, सामुदायिक भवन निर्माण और हर घर तक बिजली-पानी पहुंचाने जैसी योजनाएं के लिए भी फैसले किए है।
सीएम ने बुधवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सरकार ने उन आदिवासी परिवारों की पहचान करने का निर्णय लिया है, जहां महिला और बच्चा कुपोषित हैं। ऐसे परिवारों को दुधारू गाय दी जाएगी, जिससे उन्हें पोषण के साथ-साथ आमदनी का भी साधन मिल सके। इस योजना को पशुपालन विभाग की सब्सिडी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
सीएम ने कहा कि आदिवासी परिवारों का समग्र कल्याण सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए उन परिवारों को चिह्नित किया जाए, जिनके घर का बच्चा कुपोषित है और माता भी कमजोर है। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और स्वास्थ्य भी सुधरेगा। पशुपालन विभाग द्वारा सब्सिडी पर गाय, भैंस और बकरी पालन की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है, और इसी के तहत यह योजना लागू की जाएगी।
हर आदिवासी के लिए पक्के घर की व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदिवासी वर्ग के सभी पात्र हितग्राहियों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कोई भी हितग्राही सरकारी योजना के तहत आवास पाने से वंचित न रहे। यदि किसी कारणवश कोई आदिवासी हितग्राही आवास प्राप्त करने से रह जाता है, तो उसे प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना की शर्तों के आधार पर पक्का घर दिलाया जाए।
मजरे टोलों में गरीब आदिवासी, इसलिए यहां होगा फोकस
गांवों में आदिवासी परिवार आमतौर पर मजरे-टोलों में बसते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि आदिवासी गांवों, बसाहटों और मजरे-टोलों में आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए केंद्र सरकार की ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत भी कार्य किए जाएंगे।
टिकाऊ फसलों वाली खेती को बढ़ावा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के जनजातीय गांवों में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जाएं। भूमि के अनुरूप फसलों का चयन करने के लिए मिट्टी का परीक्षण किया जाए और किसानों को बताया जाए कि कौन-सी फसल उनके लिए अधिक लाभकारी होगी। इसके अलावा, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार आयोजित किए जाएं।
पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन के लिए सामुदायिक भवन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि आदिवासी गांवों में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और बैठकों के आयोजन के लिए सामुदायिक भवन बनाए जाएं। इससे आदिवासी संस्कृति समृद्ध होगी। उन्होंने ‘जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत प्रदेश के 11,377 चयनित आदिवासी गांवों में उगाई जाने वाली रागी, कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज (मिलेट्स) की सरकारी खरीद के निर्देश भी दिए।
इसके लिए विशेष मंडियां शुरू करने को कहा गया, ताकि गांव के किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिले और बिचौलियों का दखल समाप्त हो।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मछली पालन से आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। इसलिए इस क्षेत्र में भी कार्य किया जाए। जिन स्थानों पर खेती की संभावना कम है, वहां पशुपालन को बढ़ावा दिया जाए।
हर गांव और हर घर में बिजली-पानी की सुविधा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदिवासी गांवों में हर घर तक बिजली और पानी की सुविधा पहुंचाई जाए। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को ‘सोलर पंप योजना’ का लाभ प्राथमिकता से देने के निर्देश दिए। जिनके पास बिजली कनेक्शन नहीं है, उन्हें भी इस योजना का लाभ दिया जाए।
विद्युत कनेक्शन के लिए मजरा-टोला क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही, पेयजल संकट समाप्त करने के लिए ‘जल जीवन मिशन’ के तहत कार्य में तेजी लाने को कहा गया।
इन आदिवासी गांवों में 92 ‘सीएम राइज स्कूल’ बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 39 का निर्माण पूरा हो चुका है। ‘पीएम जन-मन योजना’ के तहत प्रदेश के 20 जिलों में 50 स्थानों पर 100 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 50% छात्रावास बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जनजातीय विकासखंडों में युवाओं के रोजगार को प्राथमिकता दी जाए और छात्रावासों के उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों के विकास के लिए ‘आनंद विभाग’ को गायत्री परिवार और विद्या भारती जैसी संस्थाओं से जोड़ा जाए।
पीएम आवास योजना के स्वीकृत आवासों की होगी समीक्षा
बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के तहत स्वीकृत 2 लाख 7 हजार 922 आवासों की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि 26 जनवरी तक चले जन-कल्याण पर्व के हितग्राही शामिल है या नहीं। इसके लिए 89 जनजातीय विकासखंड एवं आकांक्षी जिलों के गांवों में विशेष दल भेजकर सर्वे कराया जाए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास के अधिकारियों ने बताया कि 96 हजार हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए पहली किश्त जारी की जा चुकी है।

