कांग्रेस अब अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को आधुनिक राजनीतिक रणनीतियों और डिजिटल युग की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित करने जा रही है। 9 से 15 जून के बीच आयोजित होने वाले आवासीय प्रशिक्षण शिविरों में विधायक, जिलाध्यक्ष, प्रभारियों और संगठन पदाधिकारियों को पार्टी के इतिहास से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया प्रबंधन, चुनाव रणनीति और फेक न्यूज की पहचान तक की ट्रेनिंग दी जाएगी। खास बात यह है कि सभी प्रतिभागी प्रशिक्षण का खर्च खुद उठाएंगे।
प्रशिक्षण शिविर की मुख्य बातें:
- AICC ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के सचिन राव और एमपी कांग्रेस की टीम प्रशिक्षण देगी
- सर्वोदय मॉडल पर आधारित ट्रेनिंग, प्रत्येक शिविर दो से तीन दिन का
- राजस्थान में मॉडल लागू, अब एमपी में तैयारी शुरू
- AI, सोशल मीडिया, मोबाइल मैनेजमेंट, चुनावी रणनीति और पार्टी विचारधारा पर विशेष सत्र
- देशभर के एक्सपर्ट्स देंगे सत्र, कुल 7–8 सेशन होंगे
पार्टी की आत्ममंथन की कोशिश

पिछले चुनाव में हार और बढ़ते दलबदल के बाद कांग्रेस अब कैडर मजबूती और वैचारिक स्पष्टता पर काम कर रही है। पार्टी मानती है कि अगर हर स्तर के नेता और कार्यकर्ता प्रशिक्षित हों, तो संगठन ज्यादा प्रभावी और टिकाऊ बन सकता है।
व्यक्तिगत खर्च से ट्रेनिंग में हिस्सा
प्रशिक्षण में शामिल होने वाले विधायकों और पदाधिकारियों को पार्टी को एक निश्चित राशि जमा करनी होगी। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। कांग्रेस इस मॉडल को आत्मनिर्भर और प्रतिबद्धता आधारित नेतृत्व का हिस्सा मान रही है।
प्रशिक्षण से उम्मीदें: नई कांग्रेस, नया संदेश
कांग्रेस को उम्मीद है कि इस प्रशिक्षण से कार्यकर्ता आधुनिक चुनावी टूल्स, डिजिटल कम्युनिकेशन और पार्टी की विचारधारा को बेहतर ढंग से समझेंगे और प्रचार-प्रसार में उसका प्रभावी उपयोग कर सकेंगे।

