सोचिए, हमारे आस-पास हर दिन हजारों लोग अपनी सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से करते हैं। काम पर जाने से पहले, ऑफिस में, या दोस्तों के साथ बातचीत के दौरान—लगभग हर कोई अपने पसंदीदा पेय को लेकर व्यस्त रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही रोजमर्रा की आदत आपके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है? हाल ही में IIT खड़गपुर के शोध में खुलासा हुआ है कि डिस्पोजेबल पेपर कप में गर्म चाय या कॉफी पीने से शरीर में लाखों सूक्ष्म प्लास्टिक कण जा सकते हैं, जो कैंसर और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

शोध के अनुसार, पेपर कप की अंदरूनी परत में लगी पतली हाइड्रोफोबिक फिल्म, जो तरल को रोकती है, गर्म चाय या कॉफी के संपर्क में आकर टूट जाती है और सूक्ष्म प्लास्टिक कण पेय में घुल जाते हैं। ये कण भारी धातुओं के वाहक बनकर शरीर में जमा होते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।
भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वे मिट्टी, कांच या स्टील के कपों का उपयोग करें और पेपर या प्लास्टिक लाइनिंग वाले डिस्पोजेबल कपों से बचें।विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि प्लास्टिक और फोम कप भी खतरे से खाली नहीं हैं। प्लास्टिक कप में पाए जाने वाले BPA और PFAS जैसे रसायन और फोम कप में Styrene गर्म पेय में मिलकर कैंसर और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
पेपर कप कैसे बनता है?
आम तौर पर पेपर कप पूरी तरह से कागज से नहीं बने होते। इनकी अंदरूनी सतह को तरल रोकने के लिए एक पतली प्लास्टिक या वैक्स कोटिंग लगाई जाती है, जिसे हाइड्रोफोबिक फिल्म कहते हैं। यह परत पानी और अन्य तरल पदार्थों को कप के बाहर रिसने से बचाती है। लेकिन जब यह गर्म चाय या कॉफी जैसे पेय पदार्थ के संपर्क में आती है, तो यह फिल्म टूटने लगती है और माइक्रोप्लास्टिक कण पेय में घुल जाते हैं।
इन माइक्रोप्लास्टिक पार्टिकल्स का शरीर में प्रवेश खतरे से खाली नहीं है। ये कण कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, हार्मोन में असंतुलन पैदा करते हैं, नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

माइक्रोप्लास्टिक से बचने के उपाय
मिट्टी के किचन-उपयोग वाले कुल्हड़ या कांच के कप को प्राथमिकता दें।
स्टील के गिलास अपनाएं, जो टिकाऊ और स्वास्थ्य-सुरक्षित होते हैं।
डिस्पोजेबल पेपर या प्लास्टिक कप का इस्तेमाल जितना संभव हो कम करें।
बाहर से पेय लेते समय अपना कप लेकर जाएं।

रोजाना अपनाएं ये आदतें
⦁ जितना हो सके घर पर ही चाय या कॉफी बनाएं और साफ सेंनेटाइज किए गए कप का इस्तेमाल करें।
⦁ बाहर से पेपर कप में पेय खरीदते समय स्टील या कांच के कप का विकल्प मांगें।
⦁ बच्चों और बुजुर्गों को प्लास्टिक या पेपर कप से बचाएं क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
⦁ पर्यावरण की चिंता से भी डिस्पोजेबल प्लास्टिक का उपयोग कम करें, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से खत्म नहीं होते।
इस रिसर्च से साफ हो गया है कि रोजाना पेपर कप में चाय या कॉफी पीने की आदत केवल एक मामूली सुविधा नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। माइक्रोप्लास्टिक और हानिकारक रसायन शरीर में जाकर कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और नर्वस सिस्टम की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए अब यही समय है जब हम डिस्पोजेबल कप को छोड़कर कुल्हड़, स्टील, कांच या चीनी मिट्टी के कप का इस्तेमाल शुरू करें। छोटी-सी यह बदलाव न केवल आपकी सेहत को बचाएगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा कदम साबित होगा।

