मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश का 70वां स्थापना दिवस: “उद्योग और रोजगार वर्ष” के तहत समृद्ध संस्कृति, विरासत और विकास का भव्य उत्सव

अभ्युदय स्थापना दिवस 2025। मध्यप्रदेश 1 नवंबर 2025 को अपने 70वें स्थापना दिवस का जश्न मना रहा है। इस वर्ष का थीम “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” रखा गया है। राजधानी भोपाल के विभिन्न मार्गों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर राज्य की लोक एवं जनजातीय संस्कृति, परंपराएँ और रंग बिखरे दिखाई दिए। समारोह के पूर्वरंग के तहत शहर में सांस्कृतिक यात्राओं का आयोजन किया गया, जिसमें मालवा, बैतूल, सीधी और डिंडोरी जैसे अंचलों के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्यों और वाद्ययंत्रों के साथ आम नागरिकों को आकर्षित किया।

इस आयोजन में मुख्य रूप से लोक और जनजातीय नृत्यों, संगीत प्रस्तुतियों और सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया गया। राजधानी के मार्गों पर निकाली गई यात्राओं में कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा पहनकर प्रदर्शन किया और लोगों ने उनसे सेल्फी लेकर उत्साह व्यक्त किया। आम नागरिकों को मध्यप्रदेश की विविधतापूर्ण संस्कृति और स्थापना दिवस समारोह में भाग लेने का अवसर मिला।

मुख्य कार्यक्रम और आकर्षण

1 नवम्बर: 2000 ड्रोन शो के साथ “विरासत से विकास” का प्रदर्शन, 500+ कलाकारों की “विश्ववंद – श्रीकृष्ण की सांगीतिक यात्रा”, प्लेबैक सिंगर जुबिन नौटियाल का संगीत।

2 नवम्बर: महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन, गायक हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुति।

3 नवम्बर: महानाट्य का पुनः मंचन, गायिका स्नेहा शंकर की संगीत प्रस्तुति।

मेले और प्रदर्शनी: “एक जिला-एक उत्पाद” शिल्प मेला, देशज व्यंजन मेला, “विक्रमादित्य और अयोध्या”, “मध्यप्रदेश के मंदिर-देवलोक”, “विरासत से विकास”।

लोक और जनजातीय नृत्य: करमा, भगोरिया, बधाई, गणगौर, मोनिया।

स्थापना दिवस पर प्रस्तावित योजनाएँ

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘पीएम श्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा’ की शुरुआत, जिससे भोपाल-उज्जैन के बीच हवाई सेवा मिलेगी.​

‘एक जिला-एक उत्पाद’ मेले में हर जिले की शिल्पकला, हस्तनिर्मित वस्तुएं और स्थानीय व्यंजन प्रदर्शित होंगे.​

‘विकसित मध्यप्रदेश-2047’ प्रदर्शनी में प्रदेश के 2047 तक के विज़न को दर्शाया जाएगा.​

नवाचारकर्ताओं, युवा उद्यमियों, जनजातीय कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा तथा स्थानीय और पारंपरिक कलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे.

समृद्ध मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश भारत का हृदय है, जो वन, जल, अन्न, खनिज, शिल्प, कला, संस्कृति, उत्सव और परंपराओं से समृद्ध है। यहाँ मां नर्मदा, चंबल, पार्वती और शिप्रा नदियों का सान्निध्य है और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त है। यह प्रदेश भगवान परशुराम की जन्मस्थली, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली और आदि शंकराचार्य की तपोस्थली है। चित्रकूट में भगवान श्रीराम का प्रवास, राजा नल, भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जन्मस्थली, और उज्जैन से प्रारंभ हुई विक्रम संवत् जैसी ऐतिहासिक घटनाएँ मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाती हैं।

विकास, उद्योग और निवेश प्रगतिशील सफर

मध्यप्रदेश अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक भव्यता के साथ विकास की दिशा में अग्रसर है। राज्योत्सव की थीम ‘उद्योग और रोज़गार’ है, जो सतत विकास, सांस्कृतिक समृद्धि और जनभागीदारी को प्रदर्शित करती है। प्रदेश में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट, निवेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय रोड-शो के माध्यम से निवेश को बढ़ावा दिया गया है। इनोवेशन हब, स्टार्टअप पॉलिसी और फंडिंग सपोर्ट के माध्यम से प्रदेश ने स्टार्टअप क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं, क्षमता और दक्षता को केंद्र में रखते हुए मध्यप्रदेश ने उद्योग और रोजगार के अवसरों को नए स्तर पर पहुँचाया है।

मध्यप्रदेश का 70वां स्थापना दिवस ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ थीम के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास, गौरवशाली विरासत, रोजगार, नवाचार व भागीदारी का उत्सव है, जिससे प्रदेशवासियों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व और भविष्य के लिए नई प्रेरणा मिलेग। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश नवाचार, निवेश और कौशल विकास में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा ह। 2025 में लागू ‘स्टार्टअप नीति’ और ‘कौशल विकास मिशन’ के जरिए लाखों युवाओं को उद्योग-आधारित प्रशिक्षण और रोजगार मिला है, जिससे वे ‘जॉब सीकर’ की जगह ‘जॉब क्रिएटर’ बन रहे हैं.

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