भोपाल: नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले, राजधानी भोपाल में स्कूली बसों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी स्कूलों में ट्रांसपोर्ट अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो बसों की फिटनेस, ड्राइवर की स्क्रीनिंग और ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित करेंगे। केवल संयुक्त सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही बसों को संचालन की अनुमति दी जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- ट्रांसपोर्ट अधिकारियों की तैनाती: हर स्कूल में ट्रांसपोर्ट अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो बसों की फिटनेस और ड्राइवर की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करेंगे।
- सुरक्षा मानकों का पालन: सभी बसों में GPS, CCTV कैमरे, स्पीड गवर्नर, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी विंडो और फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
- नियमों का उल्लंघन: नशे में या बिना लाइसेंस के ड्राइवरों को काम पर नहीं रखा जाएगा।
- अदालत के दिशा-निर्देश: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 12 साल पुरानी बसों के संचालन पर प्रतिबंध और सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
अतिरिक्त जानकारी:

हाल ही में बाणगंगा इलाके में हुई एक बस दुर्घटना में ट्रेनी डॉक्टर की मौत के बाद, प्रशासन ने स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। इस दुर्घटना में यह भी सामने आया कि स्कूल बस का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा था, जिससे सुरक्षा मानकों की गंभीरता और बढ़ गई है।
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले, भोपाल में स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कठोर कदम उठाए हैं। ट्रांसपोर्ट अधिकारियों की तैनाती और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करके, बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। यह कदम न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है।

