मध्यप्रदेश के सरकारी कॉलेजों में 4700 से अधिक अतिथि विद्वानों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं। तबादलों की प्रक्रिया के दौरान महाविद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा इनकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं, जिससे इन शिक्षकों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है।
संघर्ष मोर्चा का आरोप: सरकार ने नहीं निभाया वादा
अतिथि विद्वान नियमितिकरण संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनाव से पहले महापंचायत में अतिथि विद्वानों से जो वादे किए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
महापंचायत में किए गए वादे
11 सितंबर 2023 को हुई महापंचायत में मुख्यमंत्री ने निम्नलिखित घोषणाएं की थीं:
- अतिथि विद्वानों को 1500 रुपये प्रति कार्य दिवस के मानदेय के बजाय 50000 रुपये का निश्चित वेतन दिया जाएगा।
- अतिथि विद्वानों के पद स्थायी माने जाएंगे और उन्हें नौकरी से बाहर नहीं किया जाएगा।
- उन्हें सरकारी कर्मचारियों की तरह सभी सुविधाएं दी जाएंगी।
- जो अतिथि विद्वान फॉलन आउट होंगे, उन्हें सेवा में वापस लिया जाएगा।
तबादलों के कारण सेवाओं की समाप्ति

अतिथि विद्वानों का कहना है कि आगामी तबादलों के कारण कई विद्वानों को हटाया जाएगा। इसके अलावा, पीएससी से भी नियुक्तियां होने वाली हैं, जिससे पद भरे जाएंगे और जिन अतिथि विद्वानों को हटाया जा रहा है, उनके स्थान पर नए लोगों को नहीं लिया जाएगा।
अतिथि विद्वानों की स्थिति
अतिथि विद्वानों की उम्र 45 से 55 वर्ष के बीच है और वे पीएचडी, नेट, स्लेट जैसी योग्यताएं रखते हैं। वे 20 से 25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित नहीं किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार ने महापंचायत में हुई घोषणाओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इन वादों को नजरअंदाज किया है, जिससे अतिथि विद्वानों में निराशा और आक्रोश व्याप्त है।
आंदोलन की चेतावनी
अतिथि विद्वान नियमितिकरण संघर्ष मोर्चा ने जून में आंदोलन करने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ने उनके वादों को पूरा नहीं किया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

