मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज सोमवार को पांचवां दिन है। सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने मंडला में हुए नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी करने के बाद उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया।
मंडला विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि सरकार मंडला एनकाउंटर की जांच कराने को तैयार नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी हमारी मांग को खारिज कर दिया। भाजपा सरकार के इस तानाशाही रवैये के विरोध में हमने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया है।
वहीं, सदन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश संशोधन विधेयक पेश किया। इसके बाद फिलहाल बजट पर चर्चा चल रही है।
पूर्व सीएम कमलनाथ भी विधानसभा पहुंचे
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी आज विधानसभा पहुंचे। उन्होंने मऊगंज में एएसआई की हत्या और इंदौर में वकील-पुलिस झड़प पर कहा कि मध्यप्रदेश कानून-व्यवस्था की अव्यवस्था की राजधानी बन चुका है। भ्रष्टाचार की राजधानी बन चुका है। पूरा देश मध्यप्रदेश की ओर देख रहा है।
सरकार जनता को कर्ज में डूबा रही
बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि सरकार जनता को कर्ज में डूबाने का काम कर रही है। उन्होंने बताया, 31 मार्च 2026 तक 28,236 करोड़ का कर्ज का ब्याज चुकाना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि 5,30,000 करोड़ से अधिक का कर्ज 31 मार्च 2026 तक होने की संभावना है, जिससे राज्य का राजकोषीय घाटा 78 हजार 902 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। बच्चन ने कहा कि अगर यह आंकड़ा गलत साबित होता है, तो वे सदन में दी जाने वाली किसी भी सजा को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
जल जीवन मिशन में 17,136 करोड़ का प्रावधान
रहली से भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि एक दौर था जब पानी का संकट बहुत गंभीर था। लोगों को 15 किलोमीटर दूर तक सिर पर गागर रखकर पानी लाने के लिए जाना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत 17,136 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। अब घर-घर में नल से पानी मिलने लगा है।
भार्गव ने कहा कि पानी के संकट से जूझ रहे कई गांवों में तो बेटों के विवाह तक नहीं हो पाते थे। लोग ऐसे गांवों में अपनी बेटियों का विवाह करने से कतराते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं और इन गांवों में भी सुविधाएं उपलब्ध होने लगी हैं।
कांग्रेस विधायक ने की नारेबाजी, मंडला एनकाउंटर की जांच की मांग
कांग्रेस विधायकों ने मंडला में हुए नक्सली एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी करने के बाद सदन से वॉकआउट किया।
मंडला विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि सरकार मंडला एनकाउंटर की जांच कराने को तैयार नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी हमारी मांग को खारिज कर दिया। भाजपा सरकार के इस तानाशाही रवैये के विरोध में हमने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया है।
लोकायुक्त से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल में लोकायुक्त से मिलने पहुंचा है। यह प्रतिनिधिमंडल लोकायुक्त को परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा घोटाले से संबंधित सबूत सौंपा। इसके साथ ही, प्रतिनिधिमंडल लोकायुक्त से इस मामले की जांच में तेजी लाने की मांग की।

लाल बसों का मुद्दा विधानसभा पहुंचा
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भोपाल में संचालित लाल बसों के संचालन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि भोपाल की किन-किन रूटों पर लाल बसों का संचालन हो रहा है और किन एजेंसियों से इन बसों का संचालन किया जा रहा है। शर्मा ने यह भी सवाल किया कि अगर लाल बसों का परिचालन सफलतापूर्वक नहीं हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
भोपाल से आसपास के इलाकों तक बसें नहीं चल रही
शर्मा ने बताया कि भोपाल से मंडीदीप, सांची, झगरिया, सीहोर, रायसेन और भोजपुर जैसे इलाकों तक बसें नहीं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में 100 नई बसें आने वाली हैं, और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पहले की तरह कोई गड़बड़ी न हो।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नई बसों के संचालन की पूरी निगरानी होनी चाहिए। साथ ही, पहले बस संचालन में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति गठित की जानी चाहिए। इस पर परिवहन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि इस मामले की जांच के लिए प्रमुख सचिव को निर्देश दे दिए जाएंगे।
कांग्रेस का लगातार विरोध प्रदर्शन
बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने काले कपड़े का नकाब पहनकर और तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार सत्र की अवधि कम रखकर चर्चा से बच रही है और जनता के सवालों से मुंह छिपा रही है। इसलिए काले नकाब के साथ प्रदर्शन कर सरकार को जगाने और सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की गई।





