जब थायराइड हार्मोन यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन या थायरॉक्सिन में असंतुलन या उतार-चढ़ाव होता है, तो उस स्थिति को मेडिकल भाषा में थायराइड बीमारी या रोग कहा जाता है। वर्तमान में यह समस्या तेजी से फैल रही है, जो मुख्य रूप से महिलाओं को अपना शिकार बना रही है।
हम महिलाओं में थायराइड के लक्षणों के बारे में जानेंगे, जिससे आप इसका त्वरित इलाज प्राप्त कर पाएंगे। यहां आपको एक बात का खास ख्याल रखना होगा कि इस ब्लॉग में लिखी गई सारी जानकारी एक सामान्य जानकारी है, इसलिए इस स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए आप हमारे अनुभवी एवं सर्वश्रेष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या फिर थायराइड विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लें।
थायराइड क्या होता है?
थायराइड के लक्षण को समझने से पहले हम यह समझते हैं कि थायराइड क्या है? गर्दन के निचले भाग में स्थित तितली के जैसे ग्लैंड को मेडिकल भाषा में थायराइड कहा जाता है। इसका काम शरीर की कई आवश्यक गतिविधियों को कंट्रोल करना है जैसे कि भोजन को ऊर्जा में बदलना, शरीर के लगभग सभी अंग को प्रभावित करना, शरीर के तापमान, मूड और व्यवहार को मैनेज करना इत्यादि।
थायराइड ग्लैंड ट्राईआयोडोथायरोनिन (टी 3) और थायरोक्सिन (टी4) हार्मोन का निर्माण करती है। इन दोनों हार्मोन को आम बोलचाल की भाषा में थायराइड हार्मोन कहा जाता है। टी3 और टी4 हार्मोन का काम शरीर की अनेक गतिविधियों को कंट्रोल करना है।
यह हार्मोन कैलोरी खपत को कंट्रोल करके वजन को घटने या बढ़ने में मदद करते हैं। दिल की धड़कन को तेज या धीमा करके उनकी गति को कंट्रोल करते हैं और शरीर का तापमान कम या अधिक करके उसके तापमान को नियंत्रण में रखते हैं तथा मांसपेशियों के सिकुड़ने की गतिविधि को भी नियंत्रित करते हैं।
महिलाओं में थायराइड क्यों होता है?
चलिए सबसे पहले समझते हैं कि महिलाओं में थायराइड क्यों होता है? महिलाओं में थायराइड के अनेक कारण हैं जैसे कि वायरल संक्रमण की चपेट में आना, लंबे समय तक तनाव यानी स्ट्रेस में रहना, डिलीवरी के बाद शरीर में बदलाव आना, शरीर में आयोडीन की कमी होना, और महिला के शरीर में हार्मोनल असंतुलन होना आदि। यह कारणों के साथ-साथ जोखिम कारक भी है। महिलाओं में थायराइड बढ़ने से गर्दन में सूजन, दर्द, और सांस लेने में तकलीफ होती है। इसके साथ-साथ कई बार महिलाओं का प्रजनन चक्र भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है।
थायराइड के लक्षण
इस स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही महिला खुद में अनेक थायराइड के लक्षणों का अनुभव करती है, जिसकी मदद से उसे या डॉक्टर को इस बात का अंदाजा हो सकता है कि वह थायराइड बीमारी से परेशान है।
- वजन बढ़ना यानी मोटापा होना
- आवाज भारी होना
- त्वचा का सूखना
- बालों का मोटा होना
- कब्ज की शिकायत होना
- हेवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग
- दिल की धड़कन का धीमा होना
- रक्त कोलेस्टेरोल का स्तर बढ़ना
- कमजोरी और थकान महसूस करना
- ठंड को सहन करने की क्षमता कम होना
- कुछ मामलों में डिप्रेशन यानी अवसाद होना
- याददाश्त कमजोर होना यानी चीजें याद नहीं रहना
- मांसपेशियों का कोमल या कठोर होना और उसमें दर्द होना
हाइपोथायरायडिज्म की तरह ही हाइपरथायरायडिज्म के भी कुछ महत्वपूर्ण लक्षण होते हैं जैसे –
- वजन कम होना
- तनाव महसूस होना
- थायराइड ग्लैंड का आकार बढ़ना
- घबराहट और चिड़चिड़ापन होना
- मासिक धर्म अनियमित होना या बंद हो जाना
- आंखों में जलन और दृष्टि संबंधित समस्या होना
- सोने में परेशानी होना या पूर्ण रूप से नींद नहीं आना
थायराइड से जुड़ी समस्याएं

जब थायराइड ग्लैंड ज़रूरत से कम या अधिक मात्रा में हार्मोन बनाने लगता है, तो थायराइड से जुड़ी समस्याएं पैदा होती हैं। ऐसा होने पर शरीर के काम करने का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अलावा, थायराइड ग्लैंड में कैंसर वाली कोशिकाएं बनने या सूजन होने के कारण हार्मोन में असंतुलन हो जाता है।
जिसके कारण हाइपरथायराइडिज्म, हाइपोथायराइडिज्म और थाइराइड कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति में थायराइड ग्लैंड अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिसके कारण अधिक मात्रा में थायराइड हार्मोन का निर्माण होने लगता है। हालांकि, हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में थायराइड ग्लैंड से कम मात्रा में थायराइड हार्मोन का निर्माण होता है।
थायराइड कैंसर एंडोक्राइन कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है। उत्तक के आधार पर थायराइड कैंसर को दो भागों में बांटा जा सकता है। इसमें डिफ्रेंशियल थायराइड कैंसर और एनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर शामिल हैं।
महिलाओं में थायराइड के दुष्प्रभाव
थायराइड रोग से जूझ रही महिला की समग्र स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है। थायराइड रोग के कारण महिला का यौवन या मासिक धर्म समय से जल्दी या बहुत देरी से आ सकता है। हाइपरथायराइडिज्म या हाइपोथायराइडिज्म ओवुलेशन को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ मामलों में यह ओवुलेशन को पूर्ण रूप से बंद भी कर सकते हैं।
अंडाशय से अंडा रिलीज होकर फैलोपियन ट्यूब में जाने की प्रक्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। थायराइड रोग के कारण ओवरी यानी अंडाशय में सिस्ट बन सकते हैं, गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है। थायराइड हार्मोन की कमी के कारण गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी, स्टिलबर्थ यानी डिलीवरी से पहले शिशु की मृत्यु होना, पोस्टपार्टम हेमरेज आदि का खतरा भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ का यह भी मानना है कि थायराइड रोग के कारण 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज आ सकता है। इतना ही नहीं, थायराइड हार्मोन में उतार-चढ़ाव के कारण हल्का या हेवी पीरियड्स, अनियमित पीरियड्स साइकिल, पीरियड्स का न आना (एमेनोरिया) आदि की समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
थायराइड कैसे ठीक होता है?
थायराइड रोग के इलाज के लिए डॉक्टर सबसे पहले उसके स्तर को सामान्य करने का सुझाव देते हैं। ऐसा करने के विभिन्न कारण हैं। थायराइड को ठीक करने के लिए निम्नलिखित इलाज के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है –
- एंटी-थायराइड दवाएं जैसे मेथिमाज़ोल और प्रोपाइलथियोरासिल
- रेडियोधर्मी आयोडीन
- बीटा ब्लॉकर्स थायराइड के स्तर को कम करने के साथ साथ लक्षणों से भी आराम दिलाने में मदद करता है।
- थायराइड के लिए घरेलू उपचार, जिसमें स्वस्थ आहार और खुद को हाइड्रेट रखना शामिल है।
- सर्जरी
निदान के परिणाम के आधार पर ही डॉक्टर इलाज के विकल्प का सुझाव देते हैं। इसलिए लक्षणों के अनुभव होते ही डॉक्टर से परामर्श लें।

