भोपाल

MP News: लोधी-लोधा समाज ने भोपाल में किया पुतला दहन, जीतू पटवारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

MP News: लोधी लोधा लोध क्षत्रिय महासभा ने भोपाल कलेक्टर कार्यालय के सामने मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का पुतला दहन किया। इस दौरान, लोधी समाज के सैकड़ों लोग एकत्रित हुए और अपनी आवाज उठाई।
लोधी-लोधा समाज ने भोपाल समेत प्रदेश भर में फूंका जीतू पटवारी का पुतला, राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन

भोपाल में विरोध प्रदर्शन

भोपाल में अखिल भारतीय लोधी लोधा लोध क्षत्रिय महासभा ने शुक्रवार 7 मार्च दोपहर 12 बजे को कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन भोपाल कलेक्टर कार्यालय के सामने हुआ, जहाँ लोधी समाज के सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए और पटवारी का पुतला जलाया।

ज्ञापन सौंपा गया

पुतला दहन के बाद, लोधी समाज के नेताओं ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल के नाम कलेक्टर प्रतिनिधि डिप्टी कलेक्टर अजय शर्मा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जीतू पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई, विशेषकर पंचायत ग्रामीण एवं श्रम कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल पर लगाए गए झूठे आरोपों के संदर्भ में।

इस विरोध प्रदर्शन में समाज के कई प्रमुख सदस्य शामिल थे, जिनमें जिला अध्यक्ष राहुल वर्मा लोधी, महामंत्री प्रीतम लोधी और अन्य समाज के नेता शामिल थे। उनका आरोप था कि कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल पर झूठे आरोप लगाए और वीरांगना रानी अवंतीबाई का अपमान किया।

जालम सिंह पटेल का बयान

लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष, जालम सिंह पटेल ने कहा कि जीतू पटवारी ने राजगढ़ में रानी अवंतीबाई की मूर्ति अनावरण समारोह के बाद मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बयान को गलत तरीके से पेश किया। उनका कहना था कि पटवारी की टिप्पणियाँ लोधी समाज और वीरांगना रानी अवंतीबाई का अपमान करने वाली थीं। समाज ने यह भी मांग की कि कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए।

यह विरोध केवल भोपाल तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रदेशभर में कई स्थानों पर जीतू पटवारी का पुतला जलाया गया और ज्ञापन सौंपे गए। लोधी समाज ने इस प्रदर्शन के माध्यम से अपना विरोध जताया और सरकार से उचित कार्रवाई की मांग की।

सामाजिक एकता का संदेश

लोधी-लोधा समाज का यह आंदोलन मध्य प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना है, जो समाज के अधिकारों और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उनकी दृढ़ता को दर्शाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विरोध का क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देती है।

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