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साइबर फ्रॉड का नया तरीका: कॉल मर्ज स्कैम, बचाव के 8 आसान टिप्स

इंटरनेट और स्मार्टफोन के दौर में अब ठगों के हथकंडे भी हाईटेक हो गए हैं। हाल में एक नया तरीका सामने आया है – कॉल मर्ज फ्रॉड। इस धोखाधड़ी में साइबर अपराधी कॉल मर्जिंग फीचर का दुरुपयोग कर लोगों के अकाउंट से पैसा गायब कर रहे हैं।

कॉल मर्ज फ्रॉड क्या है?

इस फ्रॉड में ठग पहले खुद को आपके किसी परिचित का जानकार बताता है। वह एक भरोसेमंद बातचीत शुरू करता है और फिर कहता है कि आपके दोस्त की भी कॉल आ रही है — तीनों मिलकर बात करें, इसलिए कॉल मर्ज करें।

जैसे ही व्यक्ति कॉल मर्ज करता है, दूसरी तरफ की कॉल असल में एक ऑटोमेटेड वॉयस OTP कॉल होती है। स्कैमर OTP सुन लेता है और तुरंत बैंकिंग या किसी अन्य ऑनलाइन अकाउंट से पैसे निकाल लेता है।

वॉयस OTP कॉल कितनी आम हो गई है?

आजकल वॉयस OTP कॉल का इस्तेमाल बैंक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और हेल्थ सर्विसेज में तेजी से बढ़ गया है। ज्यादातर संस्थान इसे SMS OTP का सुरक्षित विकल्प मानते हैं। जहाँ नेटवर्क कमजोर होता है या वृद्ध लोगों को टेक्स्ट पढ़ने में कठिनाई होती है, वहाँ वॉयस OTP अधिक मददगार साबित होती है। लेकिन इसी सुविधा का लाभ अब साइबर ठग उठा रहे हैं।

क्यों खतरनाक है यह स्कैम?

यह फ्रॉड भरोसे पर टिका होता है। कॉल सामान्य लगती है और तकनीकी रूप से निर्दोष दिखती है, इसलिए बहुत से लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। कुछ ही मिनटों में उनकी मेहनत की कमाई ठगों के खाते में जा सकती है।

अगर गलती से OTP शेयर हो गया तो क्या करें?

तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा की हेल्पलाइन पर संपर्क करें और संदिग्ध ट्रांजैक्शन को ब्लॉक करने का अनुरोध करें।

बैंकिंग और UPI ऐप्स से लॉगआउट करें व पासवर्ड/पिन बदलें।

फोन में कोई संदिग्ध ऐप या लिंक मिला हो तो उसे तुरंत हटाएं।

साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय पोर्टल cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

सभी OTP आधारित अकाउंट्स (बैंक, ईमेल, सोशल मीडिया) की सिक्योरिटी सेटिंग्स अपडेट करें।

सतर्क रहने के 8 तरीके

कभी भी अनजान नंबर की दूसरी कॉल को मर्ज न करें।

किसी कॉल पर OTP साझा न करें।

बैंक या सरकारी संस्था कभी OTP या कॉल मर्ज करने को नहीं कहती।

पासवर्ड और पिन को नियमित रूप से बदलते रहें।

बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे स्कैम्स के बारे में सरल भाषा में बताएं।

उनके फोन में कॉल मर्ज लिमिट सेट करें

OTP नोटिफिकेशन को पिन लॉक से सुरक्षित करें।

अनजान कॉल या लिंक पर क्लिक करने से पहले दो बार सोचें।

क्या WhatsApp जैसे ऐप्स पर भी जोखिम है?

वर्तमान में व्हाट्सएप पर कॉल मर्ज फीचर सीमित है, लेकिन स्कैमर चैट या कॉल के दौरान फिशिंग लिंक भेजकर ठगी कर सकते हैं। मतलब, चाहे मोबाइल नेटवर्क से कॉल आए या इंटरनेट कॉल से — सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

क्या सरकार कोई जागरूकता अभियान चला रही है?

हाँ, केंद्रीय और राज्य स्तर पर साइबर सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार लोगों को शिक्षा दे रही हैं। “साइबर दोस्त”, “संचार साथी” और “1930 हेल्पलाइन” जैसे प्रयास इसी ओर कदम हैं ताकि कोई भी व्यक्ति ऐसी ठगी का शिकार न बने।

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