भारत में बढ़ती ग्रेजुएट बेरोजगारी: 67% बेरोजगार युवा डिग्रीधारी, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की नई रिपोर्ट ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’ ने देश में रोजगार की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 से 29 साल के बेरोजगार युवाओं में ग्रेजुएट्स का हिस्सा तेजी से बढ़ा है और अब यह लगभग 67% तक पहुंच गया है। यानी देश में हर तीन में से दो बेरोजगार युवा पढ़े-लिखे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब देश में उच्च शिक्षा तक पहुंच लगातार बढ़ी है।
20 साल में दोगुना हुआ आंकड़ा
रिपोर्ट के अनुसार, 2004 में जहां करीब 32% बेरोजगार युवा ग्रेजुएट थे, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 67% हो गया। इसी दौरान ग्रेजुएट युवाओं की कुल हिस्सेदारी भी 10% से बढ़कर 28% तक पहुंच गई। हर साल करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट जुड़ रहे हैं, लेकिन रोजगार के अवसर उसी गति से नहीं बढ़ पा रहे। रोजगार पाने वाले ग्रेजुएट्स की संख्या सालाना लगभग 28 लाख ही बढ़ी है, जिनमें से केवल 17 लाख को ही वेतनभोगी नौकरी मिल रही है।
ज्यादा डिग्री, कम नौकरियां
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि देश में ग्रेजुएट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए पर्याप्त रोजगार नहीं बन पा रहे। इसके चलते पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है और उनकी कमाई पर भी असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्किल की कमी, अनुभव की कमी और इंडस्ट्री की जरूरतों से मेल न खाना इसके बड़े कारण हैं।
कमाई में भी गिरावट
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2017 के बाद से युवाओं, खासकर पुरुषों की आय में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी हो गई है। वहीं ग्रेजुएट और नॉन-ग्रेजुएट की कमाई के बीच अंतर भी बढ़ा है। कई युवाओं को पढ़ाई के बावजूद अपेक्षित वेतन नहीं मिल पा रहा।
शिक्षा में आर्थिक बाधाएं
उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ने के बावजूद आर्थिक चुनौतियां अभी भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं। खासकर इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे प्रोफेशनल कोर्स की फीस गरीब परिवारों के लिए बड़ी समस्या है। हालांकि 2007 से 2017 के बीच इस अंतर में कुछ कमी आई, लेकिन अब भी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत में शिक्षा और रोजगार के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। डिग्रीधारियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन रोजगार के मौके उसी हिसाब से नहीं बन रहे। ऐसे में स्किल डेवलपमेंट, इंडस्ट्री-ओरिएंटेड एजुकेशन और रोजगार सृजन पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।

