MP: संविधान शिल्पी बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती पर सीएम मोहन यादव ने किया नमन, कहा– उनके विचार आज भी हैं प्रासंगिक

संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आज देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बाबा साहेब को नमन करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने वे स्वतंत्रता के समय थे। समता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित उनका दृष्टिकोण हमें आत्मनिर्भर और समरस भारत के निर्माण की प्रेरणा देता है।

आज भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के प्रणेता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है। इस अवसर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी बाबा साहब को नमन करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है ‘संविधान निर्माता, भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूँ। आपने समता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के मूल्यों से भारत के नवनिर्माण की नींव को मजबूत किया। आपके विचार, संघर्ष और नेतृत्व हम सभी भारतीयों के लिए आत्मगौरव का प्रतीक हैं, जो हमें विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की सतत प्रेरणा देते रहेंगे।’

डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे। सामाजिक समानता, शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों की वकालत करने वाले उनके विचार हर पीढ़ी को प्रेरित करते रहे हैं। ये दिन न सिर्फ उनके योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने का संकल्प लेने का भी दिन है।

डॉ. अंबेडकर का प्रारंभिक जीवन

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक साधारण परिवार में हुआ था। उस दौर में समाज में छुआछूत और जातिगत भेदभाव की गहरी खाई थी। दलित समुदाय से आने वाले बाबा साहब ने इन कुरीतियों के खिलाफ पुरज़ोर आवाज भी उठाई। कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले अंबेडकर ने अपनी विद्वता से दुनिया को चकित किया। अर्थशास्त्र, कानून और समाजशास्त्र में उनकी गहरी समझ ने उन्हें सामाजिक सुधारों का अगुआ बनाया।

संविधान निर्माता और सामाजिक सुधारक

डॉ. अंबेडकर को भारतीय संविधान का प्रमुख शिल्पी हैं। संविधान निर्माण समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसे दस्तावेज का नेतृत्व किया जो समता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है। उनका मानना था कि सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं, जब तक कि सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित न हो।

उन्होंने अछूतों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई और ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ तथा ‘सामाजिक सुधार सेना’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से दलितों को संगठित किया। उनका आंदोलन केवल अधिकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वाभिमान प्राप्ति के लिए एक आंदोलन था।

विचारक, लेखक और समाज सुधारक के रूप में बाबा साहब का योगदान

बाबा साहब सिर्फ संविधान निर्माता ही नहीं बल्कि एक महान विचारक, लेखक और समाज सुधारक भी थे। उनकी पुस्तकें जैसे ‘एनिहिलेशन ऑफ कास्ट’ और ‘हू वर द शूद्राज’ ने जातिवाद की जड़ों को उजागर किया और समाज को नई दिशा दी। उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाकर लाखों लोगों को आत्मसम्मान और मानवता का रास्ता दिखाया। उनका मानना था कि शिक्षा, संगठन और संघर्ष ही  पीड़ित वर्गों को सशक्त बना सकता है। आज उनकी जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है और उनके अतुलनीय योगदान को याद किया जा रहा है।

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