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MP News: एम्स भोपाल ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र, आयुष्मान योजना में हार्ट ट्रांसप्लांट को जोड़ने का दिया सुझाव

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एम्स में पहली बार सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। ट्रांसप्लांट के लिए ब्रेन डेड मरीज के हार्ट को जबलपुर से पीएम श्री एयर एंबुलेंस के जरिए लाया गया था। कमाल की बात यह भी है कि इस ट्रांसप्लांट के लिए जबलपुर, भोपाल और इंदौर में तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि इतने ग्रीन कॉरिडोर एक साथ बनाए गए हों।
आयुष्मान योजना में हार्ट ट्रांसप्लांट को जोड़ने का दिया सुझाव

एम्स भोपाल ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आयुष्मान योजना में हार्ट ट्रांसप्लांट को जोड़ने का सुझाव दिया है। जिससे ज्यादा से ज्यादा आर्थिक रूप से कमजोर मरीज इसके दायरे में आ सकें। यहां बातें एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने शनिवार को प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने बताया कि जिस मरीज में गुरुवार को हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया, उसने होश में आते ही डॉक्टरों को अंगूठा दिखा कर आभार व्यक्त किया। यह ट्रांसप्लांट पूरे प्रदेश के लिए बेहद खास है। क्योंकि राज्य का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट है, जिसमें विशेषज्ञों की टीम से लेकर मशीनरी सब हमारी अपनी थी। इससे पहले जो राज्य में हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ उसमें मशीन से डॉक्टर तक दूसरे राज्य से आए थे।

समय सीमा से 15 मिनट पहले हुआ ट्रांसप्लांट

एम्स के कार्डियक सर्जन डॉ. योगेश निवारिया ने बताया कि हार्ट को ब्रेन डेड मरीज से निकाल ने और इधर रिसीवर मरीज में लगाने का काम 5 घंटे के अंदर हो जाना चाहिए। एम्स की टीम बुधवार रात साढ़े 11 बजे दिल निकालने के लिए सभी जरूरी उपकरण लेकर जबलपुर के लिए रवाना हुई।

वहां पहुंच कर हार्ट को हार्वेस्ट (निकालना) किया गया। इसके साथ जैसे ही टीम हार्ट को लेकर हेलीकॉप्टर में बैठी, इधर मरीज को आर्टिफिशियल हार्ट लंग मशीन पर रखा गया। साथ ही एम्स में मौजूद टीम ने रिसिवर के खराब हो चुके हार्ट को निकालना की प्रक्रिया शुरू कर दी। इतने में डोनर हार्ट एम्स पहुंचा और उसे प्रत्यारोपित कर दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया 4 घंटे 46 मिनट में की गई।

वहीं एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह ने कहा जिस मरीज में हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया, उसका दिल 20 फीसदी ही वर्किंग था। स्थिति ऐसी थी कि उठने बैठने में ही सांस फूलने लगती थी। उसकी तीन बार पहले एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी। इसके बाद भी दिल में दर्द बना रहता था। मरीज पूरी तरह से दवाइयों पर जीवित था।

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