मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मौजूदगी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जूते पहनकर श्रद्धांजलि दी, जिसे लेकर भाजपा ने तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इसे “संस्कृति और संस्कारों के खिलाफ” बताया, जबकि कांग्रेस नेता पीयूष बबेले ने राहुल का बचाव करते हुए पलटवार किया है।
क्या हुआ था?

राहुल गांधी भोपाल दौरे पर थे, जहां उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीर के सामने गुलाब की पंखुड़ियां अर्पित कीं। इस दौरान उन्होंने अपने जूते नहीं उतारे, जिसे लेकर भाजपा नेताओं ने उनकी “संवेदनशीलता और संस्कार” पर सवाल खड़े कर दिए।
सीएम मोहन यादव का बयान:
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा,
“राहुल गांधी का अपनी दादी को श्रद्धांजलि देने का तरीका मुझे जचा नहीं। यह हमारे संस्कार नहीं हैं। उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि हमारी संस्कृति में संवेदना का स्थान है।”
साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी का दौरा राज्य की राजनीति पर कोई खास असर नहीं डालेगा।
वीडी शर्मा का हमला:
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला करते हुए लिखा,
“जूते पहने हुए ही राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की, जिससे उनकी सोच और संस्कार साफ नजर आते हैं। यह दिखाता है कि उन्हें अपने पूर्वजों और भारतीय संस्कृति की समझ नहीं है।”
उन्होंने यह भी तंज कसा कि कांग्रेस ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बना रही है।
कांग्रेस का पलटवार – ‘राहुल के कद से डर गए हैं’
कांग्रेस प्रवक्ता पीयूष बबेले ने बीजेपी नेताओं के बयानों को “हीन मानसिकता” करार देते हुए जवाब दिया:
“भाजपा को राहुल जी के कद का अंदाजा हो गया है, इसीलिए वीडी शर्मा जी उनकी जूतियों तक ही देख पा रहे हैं।”
उन्होंने पलटवार में कहा कि बीजेपी पहले उन नेताओं पर कार्रवाई करे, जिन्होंने मध्यप्रदेश की वीरांगना बेटी को आतंकवादी की बहन कहा था।
मुद्दे से ज्यादा प्रतीकवाद पर सियासत
इस विवाद ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में प्रतीकों और प्रतीकात्मक आचरण पर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या श्रद्धांजलि की भावना जूतों से मापी जानी चाहिए या फिर उस नीयत से, जिससे वह अर्पित की गई?
जहां भाजपा इस घटना को संस्कृति और संस्कारों का मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस इसे राहुल गांधी की लोकप्रियता और प्रभाव से उपजा डर बता रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गर्मा सकता है, खासकर आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए।
