भोपाल:कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कल छह घंटे के भोपाल दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे मध्यप्रदेश में कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। गुजरात के बाद मध्यप्रदेश दूसरा राज्य है, जहां कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन के लिए यह विशेष अभियान शुरू कर रही है।
यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूत करने और आगामी चुनावी रणनीतियों पर चर्चा के लिए राहुल गांधी तीन अहम बैठकें लेंगे—PAC बैठक, विधायकों और सांसदों की बैठक, और AICC ऑब्जर्वर्स की बैठक।
AICC के 61 ऑब्जर्वर्स पहुंचे भोपाल, 70 होटल रूम बुक
इस संगठन सृजन अभियान के लिए AICC द्वारा देशभर से 61 ऑब्जर्वर्स नियुक्त किए गए हैं, जिनमें कई वरिष्ठ सांसद, विधायक और पूर्व मंत्री शामिल हैं। इन सभी को मध्य प्रदेश के 52 जिलों में भेजा जाएगा, जहां वे संगठन की स्थिति का आकलन करेंगे और रिपोर्ट सौंपेंगे।
राहुल गांधी के दौरे और इन पर्यवेक्षकों की आवभगत के लिए भोपाल की प्रमुख होटलों—रेडिसन, अशोका और जहांनुमा पैलेस—में 70 कमरे बुक किए गए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
PAC बैठक से शुरू होगा दिन, सांसदों-विधायकों से अलग बातचीत

राहुल गांधी सबसे पहले प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की तीसरी मंजिल पर पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार समेत राज्य के प्रमुख नेता शामिल होंगे। बैठक में मध्य प्रदेश में संगठन की चुनौतियों और चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी।
इसके बाद वे प्रदेश के विधायकों और राज्यसभा सांसदों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें जातिगत जनगणना और संसद व विधानसभा में पार्टी की भूमिका पर संवाद किया जाएगा।
ऑब्जर्वर्स को जिलों का होगा आवंटन, संगठन की “एक्स-रे” होगी
AICC द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर्स की बैठक में उन्हें आवंटित जिलों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। हर ऑब्जर्वर के साथ मप्र कांग्रेस की ओर से 4-4 सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। ये टीमें संगठन की मौजूदा स्थिति का आकलन करेंगी, पुराने सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान करेंगी और यह भी देखेंगे कि कौन-कौन से नेता पार्टी में रहकर भाजपा को फायदा पहुंचा रहे हैं।
जिला अध्यक्ष चयन की नई प्रक्रिया शुरू
संगठन सृजन अभियान के तहत प्रत्येक जिले के लिए कांग्रेस जिला अध्यक्षों के नामों का एक पैनल तैयार किया जाएगा। चयन में कार्यकर्ता की विचारधारा, वरिष्ठ नेताओं से संबंध, संगठन में सक्रियता जैसे मापदंडों को प्राथमिकता दी जाएगी।
नेताओं के प्रभुत्व से संगठन को आज़ाद कर मज़बूत करने की योजना
इस पूरे अभियान का उद्देश्य कांग्रेस संगठन को व्यक्तिवादी नियंत्रण से मुक्त कर एक स्थायी और वैचारिक ढांचे में ढालना है। इससे भविष्य में जब कोई नेता दल बदलता है, तब भी संगठन की मजबूती बनी रहे।
राहुल गांधी का यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत है। इससे कांग्रेस को न केवल जमीनी स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है, बल्कि संगठन की साख और रणनीति को भी नया आकार मिलेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मॉडल भविष्य में कांग्रेस को चुनावी सफलता की ओर ले जा सकेगा।
