मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर राजवाड़ा महल को आज बुधवार को रात तक आम जनता के लिए विशेष रूप से खोला गया है
हाल ही में यहां आयोजित मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की कैबिनेट बैठक को दरबार के पारंपरिक स्वरूप में आयोजित किया गया, जिसे देखने की उत्सुकता शहरवासियों में चरम पर है।
ऐतिहासिक स्थल पर लोकतंत्र का दरबार
राजवाड़ा महल, जो होलकर वंश की शाही विरासत का प्रतीक है, में 80 वर्षों बाद कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस आयोजन ने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में मंत्रियों ने पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर भाग लिया। बैठक के बाद पारंपरिक दाल, बाटी और चूरमा का भोजन परोसा गया ।
भव्य सजावट और सांस्कृतिक वातावरण
राजवाड़ा परिसर को फूलों और दीपों से सजाया गया, जिससे मंदिर की दिव्यता का अनुभव हुआ। दरबार हॉल में पारंपरिक राजसी कुर्सियां और सांस्कृतिक साज-सज्जा की गई। मंत्रीगण धोती, कुर्ता और अंगवस्त्र जैसे पारंपरिक वस्त्रों में सुसज्जित थे, जो प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं ।
आम जनता के लिए विशेष अवसर

कलेक्टर आशीष सिंह ने जानकारी दी कि शहरवासियों में राजवाड़ा के भीतर कैबिनेट बैठक को लेकर भारी उत्साह है, इसलिए इसे आज रात तक खुला रखा गया है। आम तौर पर यह स्थल सुबह 10 से शाम 6 बजे तक खुलता है ।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
राजवाड़ा महल, जो 1747 में निर्माणाधीन हुआ था, होलकर वंश की शाही विरासत का प्रतीक है। यह महल इंदौर के खजराना बाजार में स्थित है और 7 मंजिला संरचना के रूप में खड़ा है । यह स्थल प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, और आज की बैठक ने इस परंपरा को पुनर्जीवित किया।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक प्रशासन भी हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रह सकता है। यह एक ऐतिहासिक प्रयास है जो प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और प्रशासनिक परंपराओं को सम्मानित करता है।
