Government’s New Policy: कॉलेजों में स्टाफ की उपस्थिति के लिए सख्त नियम जारी, छह घंटे से कम समय रहने पर कटेगा मासिक वेतन

उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में प्रोफेसर्स और स्टाफ की उपस्थिति पर सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। अब, सरकारी महाविद्यालयों में यदि कोई कर्मचारी छह घंटे से कम समय तक कॉलेज में रहता है, तो उसका वेतन कट जाएगा। यह नया नियम उपस्थिति की निगरानी के लिए सार्थक एप के माध्यम से लागू किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। विभाग ने कहा है कि प्राचार्य और डीडीओ इस नीति के पालन के लिए जिम्मेदार होंगे, और अनुपस्थिति को लीव मैनेजमेंट सिस्टम में अपडेट किया जाएगा।

भोपाल, 25 अप्रैल 2025: उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य स्टाफ के कार्यकाल के समय पर सख्ती बरतने का फैसला किया है। अब सरकारी महाविद्यालयों में काम करने वाले प्रोफेसर्स और अन्य कर्मचारियों को अगर छह घंटे से कम समय तक कॉलेज में रहेंगे, तो उनके वेतन में कटौती की जाएगी। विभाग ने यह कदम शिक्षण गुणवत्ता और उपस्थिति में सुधार लाने के लिए उठाया है।

छह घंटे से कम समय काम करने पर वेतन में कटौती

उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब कॉलेजों में छह घंटे से कम समय काम करने वाले प्रोफेसर्स, एसोसिएट प्रोफेसर्स, असिस्टेंट प्रोफेसर्स, लाइब्रेरियन, क्रीड़ा अधिकारी, अतिथि शिक्षक, जनभागीदारी समिति और गैर-शैक्षणिक स्टाफ का वेतन कट जाएगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विभाग ने एक नए लीव मैनेजमेंट सिस्टम का भी विकास किया है, जिसके तहत अनुपस्थिति को अवकाश के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सार्थक एप पर उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान

विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अब वेतन का भुगतान सार्थक एप पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर किया जाएगा। यह प्रणाली मार्च माह से लागू हो चुकी है, और इसका उद्देश्य शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की उपस्थिति की निगरानी को और पारदर्शी बनाना है। सार्थक एप का डेटा प्राचार्यों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे कर्मचारियों की उपस्थिति को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे।

प्राचार्य और डीडीओ होंगे जिम्मेदार

विभाग ने यह भी साफ किया है कि इस नीति का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्राचार्यों और डीडीओ (डिप्टी डायरेक्टर ऑफ कॉलेज) की होगी। अगर वे इस नियम का उल्लंघन करते हैं या लापरवाही बरतते हैं, तो उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा। विभाग के अनुसार, सभी प्राचार्यों को प्रत्येक महीने की 30 तारीख को वेतन बनाने का आदेश दिया गया है, जिसमें उपस्थिति के अलावा कर्मचारी का कार्यकाल भी देखा जाएगा।

लीव मैनेजमेंट सिस्टम का विकास

इसके अलावा, विभाग ने यह भी घोषणा की कि अनुपस्थिति को अवकाश के साथ समायोजित करने के लिए लीव मैनेजमेंट सिस्टम का एक नया माड्यूल विकसित किया जा रहा है। इस सिस्टम के माध्यम से कर्मचारियों के अवकाश को सही तरीके से ट्रैक किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो।

इस नई नीति का उद्देश्य कॉलेजों में शिक्षकों और स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करना और सरकारी महाविद्यालयों में कार्यस्थल की पारदर्शिता को बढ़ाना है। इसके माध्यम से विभाग शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है।

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